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सुनीता : 6 महीने की ट्रेनिंग और 3 साल में ही हार्डकोर नक्सली, अवैध संबंध के लगे आरोप तो छोड़ दिया दलम

Satyakhabarindia

सुनीता एक ऐसा नाम जिसने केवल 6 महीने में हथियार चलाने सीख लिए और केवल 3 साल में वह हार्डकोर नक्सली बन गई। ऐसी हार्डकोर नक्सली कि वह संगठन के भीतर एरिया कमेटी मेंबर बन गई। उसके पास ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन के लिए नए युवाओं की भर्ती माओवादी विचारधारा का प्रचार प्रसार करना और क्षेत्र में पुलिस व सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर बारीकी से निगरानी रखना शामिल था। सुनीता को केंद्रीय कमेटी के सदस्य और को क्या नक्सली रामदेर की सुरक्षा गार्ड के रूप में भी तैनात किया गया था। वह लंबे समय से इंद्रावती और माड़ क्षेत्र में सक्रिय थी।

सुनीता ने पहली बार 2022 में दलम संगठन ज्वाइन किया था। इस संगठन में उसे समय कुल 20 लोग थे। वह 6 महीने में ही अत्याधुनिक हथियार चलाने में माहिर हो गई और वर्तमान में उसके पास इंसांस राइफल थी। 3 सालों में उसकी पहचान एक हार्डकोर नक्सली के रूप में हो गई और इस दौरान तीन राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में वह मोस्ट वांटेड घोषित कर दी गई। तीनों राज्यों की पुलिस ने उसे पर 14 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था।

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हैरान रह गई पुलिस

सुनीता हार्डकोर नक्सली थी और पुलिस उसे ढूंढ रही थी लेकिन उसे ढूंढ पाना पुलिस के लिए आसान नहीं था। रविवार सुबह 4:00 बजे सुनीता अपने हथियार वर्दी और अन्य सामग्री लेकर पैदल निकल गई। पहले उसने हथियार और सामग्री को जंगल में गड्ढा खोदकर छुपाया और उसके बाद लांजी थाना क्षेत्र के कोरिया में हॉक फोर्स कैंप पहुंची। यहां पहुंचकर उसने आत्मसमर्पण की इच्छा जताई। सुनीता को फोर्स कैंप में आया देखकर पुलिसकर्मी हैरान रह गए। पुलिसकर्मी इसलिए भी हैरान थे कि जिस सुनीता को वह ढूंढ ढूंढ कर थक गए थे वह आखिर उनके पास खुद ही चलकर आ गई। सुनीता के आने की खबर पुलिस के कर्मचारियों ने अपने आला अधिकारियों को दी। उसके बाद आला अधिकारियों ने उसके आत्म समर्पण को मंजूरी प्रदान कर दी।
बता दें कि 22 वर्ष से सुनीता छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले की रहने वाली है और आत्मसमर्पण के बाद उसने जंगल में छुपाए गए अपने हथियार और अन्य सामान को भी पुलिस के हवाले अपनी निशानदेही पर करवा दिया है।

टूटा दिल तो किया आत्मसमर्पण

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर सुनीता ने आत्मसमर्पण क्यों किया? इसके पीछे की कहानी बताते हुए सुनीता ने बताया की उसके साथ सागर नाम का एक और सुरक्षा गार्ड था। रामदेर उसे बदनाम करने लगा और आरोप लगने लगा कि उसके सागर के साथ अवैध संबंध है जबकि ऐसा कुछ नहीं था। सुनीता ने रामदेर पर शोषण करने का भी आरोप लगाया। सुनीता का कहना था कि संगठन के लोग उसे शक की नजर से देखने लगे थे और रामदेर की शादी हो चुकी है लेकिन उसके बावजूद उसने उसका शोषण किया। सुनीता की माने तो उसे यह अच्छा नहीं लगा और वह संगठन में घुट घुट कर जी रही थी इसके बाद उसने दलम छोड़ने का मन बना लिया। इसी के चलते सुनीता ने आत्मसमर्पण कर दिया।

आईजी ने की पुष्टि

बालाघाट के आईजी संजय कुमार सिंह ने सुनीता पुत्री विसरु द्वारा आतंक समर्पण किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सुनीता पर तीन राज्यों की पुलिस ने 14 लाख रुपए का इनाम रखा था।

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आगे क्या

इस मामले में पुलिस ने बताया कि सुनीता को कानून के हवाले किया जाएगा और उसकी रिहाई के बाद यह 14 लाख रुपए का इनाम उसी को दे दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बालाघाट पुलिस को दी बधाई

महिला नक्सली के आत्मसमर्पण पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट पुलिस को इस बड़ी सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश नक्सल नियंत्रण के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार बीते 10 महीनों में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के इनामी नक्सलियों को निष्क्रिय कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए सॉफ्ट टच अप्रोच अपना रही है, ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर एक सामान्य जीवन जी सकें।

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